क्या है प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान' (Gati Shakti Master Plan) की शुरुआत करेंगे Pradhanmantri Gati Shakti Yojana

क्या है 'गति शक्ति योजना' जिसकी PM मोदी करेंगे शुरुआत? बढ़ेगी विकास की स्पीड ??? 

क्या है 'गति शक्ति योजना' जिसकी PM मोदी करेंगे शुरुआत? बढ़ेगी विकास की स्पीड PM मोदी बुधवार को 'प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान' (Gati Shakti Master Plan) की शुरुआत करेंगे. इसके द्वारा करीब 100  लाख करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विकास को फुल स्पीड मिलेगी.   पीएम मोदी करेंगे गति शक्ति योजना की शुरुआत (फाइल फोटो: PIB)  पीएम मोदी करेंगे गति शक्ति योजना की शुरुआत (फाइल फोटो: PIB) राहुल श्रीवास्तव स्टोरी हाइलाइट्स पीएम मोदी करेंगे लॉन्च बुनियादी ढांचा विकास पर जोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) 13 अक्टूबर यानी बुधवार को 'प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान' (Gati Shakti Master Plan) की शुरुआत करेंगे. यह रेल और सड़क सहित 16 मंत्रालयों को जोड़ने वाला एक डिजिटल मंच है, जिसके द्वारा करीब 100 लाख करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विकास को फुल स्पीड मिलेगी.    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार 15 अगस्त को 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इसका ऐलान किया था. इसके तहत 16 मंत्रालयों और विभागों ने उन सभी परियोजनाओं को Geographic information system (GIS) मोड में डाल दिया है, जिन्हें 2024-25 तक पूरा किया जाना है. सरकार के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार इस बारे में कैबिनेट नोट तैयार है और इसे मंगलवार शाम को मंजूरी दी जा सकती है.    कल यानी 13 अक्टूबर को एक राष्ट्रीय स्तर के कॉन्फ्रेंस के द्वारा इसे लॉन्च किया जाएगा, साथ ही देश के 36 स्थानों पर इसका वर्चुअल लिंक होगा.   क्या होगा इस योजना के तहत   यह डिजिटल मंच बुनियादी ढांचा विकास कार्यों को फुल स्पीड से चलाने में मदद करेगा. इससे उद्योगों की कार्य क्षमता बढ़ाने में मदद होगी, स्थानीय विनिर्माताओं को बढ़ावा मिलेगा. यह उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा और भविष्य के आर्थिक क्षेत्रों के निर्माण के लिए नई संभावनाओं को विकसित करने में भी मदद करेगा.   कहां से आया कॉन्सेप्ट   असल में साल 2014 में सत्ता में आने के बाद ही पीएम मोदी ने एक ही तरह के काम करने वाले कई मंत्रालय एक मंत्री को सौंपकर 'सुपर मिनिस्टर्स' की अवधारणा पेश की थी ताकि बेहतर सिनर्जी तैयार हो सके. लेकिन ब्यूरोक्रेसी का सिस्टम इस तरह का है कि उसमें अलग-अलग खांचों में काम होता है. इससे निपटने के लिए गति शक्ति योजना का प्रस्ताव रखा गया ताकि साल 2024-25 तक सभी बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्ट‍िविटी के लक्ष्यों को पूरा किया जा सके.   एक तरह से यह कहा जा सकता है कि गतिशक्ति योजना 'सरकारी वर्क कल्चर' में आमूल बदलाव का एक प्रयास है जिसमें अभी तक होता यह था कि दाहिने हाथ को भी नहीं पता होता था कि बायां हाथ क्या कर रहा है.   क्या है राजनीतिक फायदा   इसमें राजनीतिक फायदा भी निहित है क्योंकि गतिशक्ति की वजह से अगर बड़ी बुनियादी परियोजनाओं का काम तेजी से होता है तो इससे प्रधानमंत्री मोदी को साल 2024 में  तीसरे कार्यकाल के लिए जीत दिलाने में मदद मिलेगी.  सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के तहत भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग और भू-सूचना विज्ञान संस्थान (BISAG-N) ने इस मंच को विकसित किया है. उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) सभी परियोजनाओं की निगरानी और कार्यान्वयन के लिए नोडल मंत्रालय होगा. परियोजनाओं का जायजा लेने के लिए एक राष्ट्रीय योजना समूह नियमित रूप से बैठक करेगा. किसी भी नई जरूरत को पूरा करने के लिए मास्टर प्लान में किसी बदलाव को मंजूरी देने को लेकर कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में सचिवों का एक अधिकार प्राप्त समूह (EGOM) गठित किया जाएगा.  सभी राज्यों को शामिल करने की योजना  सभी राज्यों से इस पहल में शामिल होने का आग्रह किया गया है, क्योंकि इससे देश भर में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के उचित कार्यान्वयन में मदद मिलेगी और आगे चलकर मंच का आंकड़ा निजी क्षेत्र को भी दिया जा सकता है. सड़क, रेलवे, दूरसंचार, तेल और गैस जैसे मंत्रालयों की परियोजनाएं इस मंच पर हैं, और इससे कपड़ा तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालयों को भी अपने पार्कों की योजना बनाने में मदद मिल सकती है.  अभी तमाम सरकारी विभाग अलग-अलग तरीके से काम करते थे और इसकी वजह से परियोजनाओं को लागू करने में देरी होती थी, लागत काफी ज्यादा हो जाती थी और आम जनता को इनका फायदा लक्ष्य से कम मिल पाता था.   गति शक्ति का मतलब ही है गति की चाल. यह मोदी सरकार का एक ऐसा महत्वाकांक्षी और व्यापक geo-spatial डिजिटल‍ प्लेटफॉर्म होगा जिसके द्वारा प्रोजेक्ट्स के लिए एकीकृत तरीके से प्लानिंग और समन्वित तरीके से क्रियान्वयन होगा. शुरुआत में इसके द्वारा केंद्र सरकार की परियोजनाओं में नए बदलाव की शुरुआत होगी, बाद में यह चलन नगर निगम के स्तर तक ले जाया जाएगा.   इसमें विभिन्न इकोनॉमिक जोन में मल्टीमोडल कनेक्ट‍िविटी इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए एक सेंट्रल नेशनल मास्टर प्लान होगा. इसमें नेशनल हाईवे, रेलवे के फ्रेट कॉरिडोर, गैस पाइपलाइन, एयरपोर्ट, एविएशन, दवाओं, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, फूड प्रोसेसिंग की मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस प्रोडक्शन, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर आदि शामिल होंगे.   16 मंत्रालयों की पहचान   शुरुआत में इसके तहत 16 ऐसे मंत्रालयों को रखने के लिए पहचान की गई है जो खासतौर से बुनियादी ढांचा विकास देखते हैं या जिनकी पहचान आर्थ‍िक वाहक के रूप में होती है. इसके तहत प्लॉट स्तर के 3D विजुअलाइजेशन मैपिंग से कम लागत में और यूजर फ्रेंडली बुनियादी ढांचा तैयार होगा, इसलिए कई राज्यों ने भी इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है.    इसमें ज्योग्रेफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम आधारित एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग, रूट प्लानिंग के लिए प्लानिंग टूल, डैशबोर्ड आधारित पीरियॉडिक मॉनिटरिंग और सैटेलाइट तस्वीरों के इस्तेमाल जैसे कईआधुनिक टेक्नोलॉजी का सहारा लिया जाएगा. इस डिजिटल सिस्टम में मंत्रालयों को अलग लॉग इन आईडी दी जाएगी, जिसमें वे नियमित रूप से अपने डेटा को अपडेट कर पाएंगे. ये सभी डेटा एक प्लेटफॉर्म पर इंटीग्रेट होंगे.   इस योजना को लागू करने के लिए एक इंटीग्रेटेड मल्टीमोडल नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप या NPG बनाया जाएगा. इसमें सभी विभागों के एक्सपर्ट या अध‍िकारी होंगे. उद्योग एवं आंतरिक व्यापार प्रोत्साहन विभाग (DPIIT) इसकी नोडल एजेंसी होगी.  इन प्रोजेक्ट की फंडिंग का तरीका पहले जैसा ही रहेगा. एक तय निश्चित रकम के प्रोजेक्ट संबंध‍ित मंत्रालयों के द्वारा मंजूर होंगे, मध्य स्तर के प्रोजेक्ट वित्त मंत्रालय के द्वारा और हाई वैल्यू के प्रोजेक्ट कैबिनेट के द्वारा.    बुनियादी ढांचे पर जोर   विकास में इस तरह से आएगी तेजी   Live TV गतिशक्ति योजना के द्वारा देश में UDAN के तहत रीजनल कनेक्ट‍िविटी में तेजी आएगी. साल 2024-25 तक एयरपोर्ट/हेलीपोर्ट/वाटरएयरोड्रम्स की संख्या बढ़कर 220 हो जाएगी. इसमें 109 नए एयरपोर्ट होंगे. इसके तहत देश में मौजूद 51 एयरस्ट्र‍िप के विकास का काम, 18 नए प्रोजेक्ट, 12 वाटर एयरोड्रम और 28 हेलीपोर्ट का निर्माण शामिल होगा.   इसी तरह साल 2024-25 तक NHAI के द्वारा संचालित राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार कर 2 लाख किमी लंबाई तक किया जाएगा. साल 2014 में यह सिर्फ 91,000 किमी था और इसी नवंबर यानी 2021 के अंत में यह 1.3 लाख किमी हो जाएगा.  इससे डिफेंस उत्पादन में भी काफी तेजी आएगी. करीब 20,000 करोड़ रुपये के निवेश से उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में 2 डिफेंस कॉरिडोर बनाने की योजना है. इसकी वजह से भारत में करीब 1.7 लाख करोड़ रुपये के डिफेंस उत्पादों का उत्पादन होगा और इनका करीब 25 फीसदी हिस्सा निर्यात किया जाएगा.  GATI SHAKTI योजना से साल 2024-25 तक देश में रेलवे की कार्गो हैंडलिंग क्षमता को मौजूदा 1200 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 1600 MT तक किया जाएगा. इससे दो डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के निर्माण में भी तेजी आएगी.  इसी तरह सरकार की योजना साल 2024-25 तक देश में गैस पाइपलाइन नेटवर्क को दोगुना कर 34,500 किमी तक करने की है. साल 2027 तक हर राज्य को नेचुरल गैस पाइपलाइन से जोड़ने की सरकार की योजना में गति शक्ति की अहम भूमिका होगी.  सरकार की योजना गंगा नदी में 29 MMT क्षमता का और अन्य नदियों में 95 MMT क्षमता का कार्गो ढुलाई करने की है. वाराणसी से असम में तिनसुख‍िया जिले के सादिया तक साल भर बड़ी नौकाएं (फेरी) चलने की शुरुआत की जाएगी. इसी तरह समुद्री बंदरगाहों से साल 2024-25 तक 1,759 एमएमटी प्रति साल की ढुलाई का लक्ष्य है.  साल 2024 तक दूरसंचार विभाग द्वारा 35 लाख किमी का ऑप्ट‍िकल फाइबर नेटवर्क बिछाने का प्लान है. इसी तरह ऊर्जा मंत्रालय के द्वारा ट्रांसमिशन नेटवर्क बढ़ाकर 4.52 लाख किमी सर्किट तक किया जाएगा.  फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री द्वारा देश में करीब 200 मेगा फूड पार्क बनाने, फिश‍िंग क्लस्टर बढ़ाकर 202 तक करने, 15 लाख करोड़ के टर्नओवर वाले 38 इलेक्ट्रॉनिक क्लस्टर बनाने, 90 टेक्सटाइल क्लस्टर बनाने और 110 फार्मा एवं मेडिकल डिवाइस क्लस्टर बनाने का लक्ष्य है.        .              मास्टर प्लान के तहत 4 इंडस्ट्रि‍यल नॉड बनाने का प्रस्ताव है. ऐसा एक इंडिस्ट्रियल नॉड यूपी के दादरी में, एक कर्नाटक के तुमुकुर में और महाराष्ट्र के शेंद्र बिडकिन में होगा.  नेशनल इंडस्ट्र‍ियल कॉरिडोर  डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत देश भर में 2024-25 तक 11 इंडस्ट्रि‍यल कॉरिडोर बनाने की योजना है.  इसे भी पढ़ें:सभी देशवासियों को श्री दुर्गा अष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

PM मोदी बुधवार को 'प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान' (Gati Shakti Master Plan) की शुरुआत करेंगे. इसके द्वारा करीब ₹100 लाख करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विकास को फुल स्पीड मिलेगी.  

" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) 13 अक्टूबर यानी बुधवार को 'प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान' (Gati Shakti Master Plan) की शुरुआत करेंगे. यह रेल और सड़क सहित 16 मंत्रालयों को जोड़ने वाला एक डिजिटल मंच है, जिसके द्वारा करीब 100 लाख करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विकास को फुल स्पीड मिलेगी ."


पीएम मोदी करेंगे गति शक्ति योजना की शुरुआत 


पीएम मोदी करेंगे लॉन्च

बुनियादी ढांचा विकास पर जोर


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) 13 अक्टूबर यानी बुधवार को 'प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान' (Gati Shakti Master Plan) की शुरुआत करेंगे. यह रेल और सड़क सहित 16 मंत्रालयों को जोड़ने वाला एक डिजिटल मंच है, जिसके द्वारा करीब 100 लाख करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विकास को फुल स्पीड मिलेगी.  


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार 15 अगस्त को 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इसका ऐलान किया था. इसके तहत 16 मंत्रालयों और विभागों ने उन सभी परियोजनाओं को Geographic information system (GIS) मोड में डाल दिया है, जिन्हें 2024-25 तक पूरा किया जाना है. सरकार के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार इस बारे में कैबिनेट नोट तैयार है और इसे मंगलवार शाम को मंजूरी दी जा सकती है.  


कल यानी 13 अक्टूबर को एक राष्ट्रीय स्तर के कॉन्फ्रेंस के द्वारा इसे लॉन्च किया जाएगा, साथ ही देश के 36 स्थानों पर इसका वर्चुअल लिंक होगा. 


क्या होगा इस योजना के तहत ? 


यह डिजिटल मंच बुनियादी ढांचा विकास कार्यों को फुल स्पीड से चलाने में मदद करेगा. इससे उद्योगों की कार्य क्षमता बढ़ाने में मदद होगी, स्थानीय विनिर्माताओं को बढ़ावा मिलेगा. यह उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा और भविष्य के आर्थिक क्षेत्रों के निर्माण के लिए नई संभावनाओं को विकसित करने में भी मदद करेगा. 


कहां से आया कॉन्सेप्ट ? 

असल में साल 2014 में सत्ता में आने के बाद ही पीएम मोदी ने एक ही तरह के काम करने वाले कई मंत्रालय एक मंत्री को सौंपकर 'सुपर मिनिस्टर्स' की अवधारणा पेश की थी ताकि बेहतर सिनर्जी तैयार हो सके. लेकिन ब्यूरोक्रेसी का सिस्टम इस तरह का है कि उसमें अलग-अलग खांचों में काम होता है. इससे निपटने के लिए गति शक्ति योजना का प्रस्ताव रखा गया ताकि साल 2024-25 तक सभी बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्ट‍िविटी के लक्ष्यों को पूरा किया जा सके. 


एक तरह से यह कहा जा सकता है कि गतिशक्ति योजना 'सरकारी वर्क कल्चर' में आमूल बदलाव का एक प्रयास है जिसमें अभी तक होता यह था कि दाहिने हाथ को भी नहीं पता होता था कि बायां हाथ क्या कर रहा है. 


क्या है राजनीतिक फायदा ? 

इसमें राजनीतिक फायदा भी निहित है क्योंकि गतिशक्ति की वजह से अगर बड़ी बुनियादी परियोजनाओं का काम तेजी से होता है तो इससे प्रधानमंत्री मोदी को साल 2024 में तीसरे कार्यकाल के लिए जीत दिलाने में मदद मिलेगी.


सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के तहत भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग और भू-सूचना विज्ञान संस्थान (BISAG-N) ने इस मंच को विकसित किया है. उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) सभी परियोजनाओं की निगरानी और कार्यान्वयन के लिए नोडल मंत्रालय होगा. परियोजनाओं का जायजा लेने के लिए एक राष्ट्रीय योजना समूह नियमित रूप से बैठक करेगा. किसी भी नई जरूरत को पूरा करने के लिए मास्टर प्लान में किसी बदलाव को मंजूरी देने को लेकर कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में सचिवों का एक अधिकार प्राप्त समूह (EGOM) गठित किया जाएगा.


सभी राज्यों को शामिल करने की योजना

सभी राज्यों से इस पहल में शामिल होने का आग्रह किया गया है, क्योंकि इससे देश भर में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के उचित कार्यान्वयन में मदद मिलेगी और आगे चलकर मंच का आंकड़ा निजी क्षेत्र को भी दिया जा सकता है. सड़क, रेलवे, दूरसंचार, तेल और गैस जैसे मंत्रालयों की परियोजनाएं इस मंच पर हैं, और इससे कपड़ा तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालयों को भी अपने पार्कों की योजना बनाने में मदद मिल सकती है.


अभी तमाम सरकारी विभाग अलग-अलग तरीके से काम करते थे और इसकी वजह से परियोजनाओं को लागू करने में देरी होती थी, लागत काफी ज्यादा हो जाती थी और आम जनता को इनका फायदा लक्ष्य से कम मिल पाता था. 


गति शक्ति का मतलब ही है गति की चाल. यह मोदी सरकार का एक ऐसा महत्वाकांक्षी और व्यापक geo-spatial डिजिटल‍ प्लेटफॉर्म होगा जिसके द्वारा प्रोजेक्ट्स के लिए एकीकृत तरीके से प्लानिंग और समन्वित तरीके से क्रियान्वयन होगा. शुरुआत में इसके द्वारा केंद्र सरकार की परियोजनाओं में नए बदलाव की शुरुआत होगी, बाद में यह चलन नगर निगम के स्तर तक ले जाया जाएगा. 


इसमें विभिन्न इकोनॉमिक जोन में मल्टीमोडल कनेक्ट‍िविटी इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए एक सेंट्रल नेशनल मास्टर प्लान होगा. इसमें नेशनल हाईवे, रेलवे के फ्रेट कॉरिडोर, गैस पाइपलाइन, एयरपोर्ट, एविएशन, दवाओं, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, फूड प्रोसेसिंग की मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस प्रोडक्शन, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर आदि शामिल होंगे. 


16 मंत्रालयों की पहचान 


शुरुआत में इसके तहत 16 ऐसे मंत्रालयों को रखने के लिए पहचान की गई है जो खासतौर से बुनियादी ढांचा विकास देखते हैं या जिनकी पहचान आर्थ‍िक वाहक के रूप में होती है. इसके तहत प्लॉट स्तर के 3D विजुअलाइजेशन मैपिंग से कम लागत में और यूजर फ्रेंडली बुनियादी ढांचा तैयार होगा, इसलिए कई राज्यों ने भी इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है.  


इसमें ज्योग्रेफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम आधारित एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग, रूट प्लानिंग के लिए प्लानिंग टूल, डैशबोर्ड आधारित पीरियॉडिक मॉनिटरिंग और सैटेलाइट तस्वीरों के इस्तेमाल जैसे कईआधुनिक टेक्नोलॉजी का सहारा लिया जाएगा. इस डिजिटल सिस्टम में मंत्रालयों को अलग लॉग इन आईडी दी जाएगी, जिसमें वे नियमित रूप से अपने डेटा को अपडेट कर पाएंगे. ये सभी डेटा एक प्लेटफॉर्म पर इंटीग्रेट होंगे. 


इस योजना को लागू करने के लिए एक इंटीग्रेटेड मल्टीमोडल नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप या NPG बनाया जाएगा. इसमें सभी विभागों के एक्सपर्ट या अध‍िकारी होंगे. उद्योग एवं आंतरिक व्यापार प्रोत्साहन विभाग (DPIIT) इसकी नोडल एजेंसी होगी. इन प्रोजेक्ट की फंडिंग का तरीका पहले जैसा ही रहेगा. एक तय निश्चित रकम के प्रोजेक्ट संबंध‍ित मंत्रालयों के द्वारा मंजूर होंगे, मध्य स्तर के प्रोजेक्ट वित्त मंत्रालय के द्वारा और हाई वैल्यू के प्रोजेक्ट कैबिनेट के द्वारा. 



बुनियादी ढांचे पर जोर

 

विकास में इस तरह से आएगी तेजी 

गतिशक्ति योजना के द्वारा देश में UDAN के तहत रीजनल कनेक्ट‍िविटी में तेजी आएगी. साल 2024-25 तक एयरपोर्ट/हेलीपोर्ट/वाटरएयरोड्रम्स की संख्या बढ़कर 220 हो जाएगी. इसमें 109 नए एयरपोर्ट होंगे. इसके तहत देश में मौजूद 51 एयरस्ट्र‍िप के विकास का काम, 18 नए प्रोजेक्ट, 12 वाटर एयरोड्रम और 28 हेलीपोर्ट का निर्माण शामिल होगा. 

 इसी तरह साल 2024-25 तक NHAI के द्वारा संचालित राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार कर 2 लाख किमी लंबाई तक किया जाएगा. साल 2014 में यह सिर्फ 91,000 किमी था और इसी नवंबर यानी 2021 के अंत में यह 1.3 लाख किमी हो जाएगा. 

इससे डिफेंस उत्पादन में भी काफी तेजी आएगी. करीब 20,000 करोड़ रुपये के निवेश से उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में 2 डिफेंस कॉरिडोर बनाने की योजना है. इसकी वजह से भारत में करीब 1.7 लाख करोड़ रुपये के डिफेंस उत्पादों का उत्पादन होगा और इनका करीब 25 फीसदी हिस्सा निर्यात किया जाएगा. 

GATI SHAKTI योजना से साल 2024-25 तक देश में रेलवे की कार्गो हैंडलिंग क्षमता को मौजूदा 1200 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 1600 MT तक किया जाएगा. इससे दो डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के निर्माण में भी तेजी आएगी. 

इसी तरह सरकार की योजना साल 2024-25 तक देश में गैस पाइपलाइन नेटवर्क को दोगुना कर 34,500 किमी तक करने की है. साल 2027 तक हर राज्य को नेचुरल गैस पाइपलाइन से जोड़ने की सरकार की योजना में गति शक्ति की अहम भूमिका होगी. 

सरकार की योजना गंगा नदी में 29 MMT क्षमता का और अन्य नदियों में 95 MMT क्षमता का कार्गो ढुलाई करने की है. वाराणसी से असम में तिनसुख‍िया जिले के सादिया तक साल भर बड़ी नौकाएं (फेरी) चलने की शुरुआत की जाएगी. इसी तरह समुद्री बंदरगाहों से साल 2024-25 तक 1,759 एमएमटी प्रति साल की ढुलाई का लक्ष्य है. 

साल 2024 तक दूरसंचार विभाग द्वारा 35 लाख किमी का ऑप्ट‍िकल फाइबर नेटवर्क बिछाने का प्लान है. इसी तरह ऊर्जा मंत्रालय के द्वारा ट्रांसमिशन नेटवर्क बढ़ाकर 4.52 लाख किमी सर्किट तक किया जाएगा. 

फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री द्वारा देश में करीब 200 मेगा फूड पार्क बनाने, फिश‍िंग क्लस्टर बढ़ाकर 202 तक करने, 15 लाख करोड़ के टर्नओवर वाले 38 इलेक्ट्रॉनिक क्लस्टर बनाने, 90 टेक्सटाइल क्लस्टर बनाने और 110 फार्मा एवं मेडिकल डिवाइस क्लस्टर बनाने का लक्ष्य है. .             

मास्टर प्लान के तहत 4 इंडस्ट्रि‍यल नॉड बनाने का प्रस्ताव है. ऐसा एक इंडिस्ट्रियल नॉड यूपी के दादरी में, एक कर्नाटक के तुमुकुर में और महाराष्ट्र के शेंद्र बिडकिन में होगा. 

नेशनल इंडस्ट्र‍ियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत देश भर में 2024-25 तक 11 इंडस्ट्रि‍यल कॉरिडोर बनाने की योजना है. 


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